सिर्फ ‘विज्ञान’ पढ़ने के लिए दांव पर लगाई जान! चमोली में बेरोजगार संघ जिला अध्यक्ष संदीप पवार आमरण अनशन पर बैठे

चमोली (उत्तराखंड): पहाड़ में बुनियादी शिक्षा के हक के लिए चल रहा आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राजकीय इंटर कॉलेज (रा.इ.का.) चौनघाट, नंदानगर चमोली में विज्ञान संकाय (Science Stream) की कक्षाएं शुरू करने की मांग को लेकर पिछले 36 दिनों से जारी शांतिपूर्ण धरना अब आमरण अनशन में बदल चुका है। शासन-प्रशासन की कथित अनदेखी से नाराज उत्तराखंड बेरोजगार संघ के चमोली जिला अध्यक्ष संदीप पवार ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

🚨 36 दिनों के धरने के बाद बड़ा कदम

‘संघर्ष समिति घूनी, रामणी, पडेरगाँव’ और अभिभावक संघ के बैनर तले स्थानीय लोग व युवा पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार धरने पर बैठे थे। आंदोलनकारियों का आरोप है कि 36 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार या प्रशासन के किसी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली। व्यवस्था की इसी संवेदनहीनता और घोर अनदेखी से विवश होकर जिला अध्यक्ष चमोली संदीप पवार को अपने प्राणों की बाजी लगानी पड़ी है और उन्होंने आमरण अनशन का रास्ता चुना है।

📚 बुनियादी हक के लिए ‘प्राणों की बाजी’

आंदोलनकारियों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी पहाड़ के बच्चों को सिर्फ ‘विज्ञान’ पढ़ने जैसे बुनियादी अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

“क्या उत्तराखंड के युवाओं को अपनी शिक्षा के अधिकार के लिए इस तरह अपने स्वास्थ्य और जीवन को दांव पर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा? उत्तराखंड बेरोजगार संघ के जिला अध्यक्ष चमोली संदीप पवार के आमरण अनशन पर बैठने के बाद भी सरकार का मौन रहना बेहद चिंताजनक है।” — स्थानीय आंदोलनकारी

📌 प्रमुख मांगें और आक्रोश

  • विज्ञान संकाय की तत्काल शुरुआत: रा.इ.का. चौनघाट में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं शीघ्र संचालित की जाएं ताकि क्षेत्र के बच्चों को दूर न जाना पड़े।
  • आर-पार की जंग: क्षेत्रवासियों का साफ कहना है कि पहाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्थानीय जनता ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जायज मांगों को अविलंब पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को बड़ा स्वरूप दिया जायेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

 

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