

चमोली: सरकारी सहायता राशि की सूची वायरल होने पर भड़की जनता, ‘चहेतों’ को रेवड़ी बांटने पर शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश
घाट (चमोली)। चमोली जिले के घाट तहसील से एक सरकारी वित्तीय सहायता पाने वाले लाभार्थियों की सूची सोशल मीडिया पर लीक/वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में जन-आक्रोश फूट पड़ा है। इस सूची ने घाटी के शांत माहौल में राजनीतिक और सामाजिक उबाल ला दिया है। आम जनता का आरोप है कि आपदा, बीमारी या आर्थिक तंगी के नाम पर आने वाले सरकारी धन को चुपके से सत्ताधारी दल भाजपा के पदाधिकारियों, संपन्न लोगों और सफेदपोशों के चहेतों की जेबों में डाल दिया गया।
एक तरफ जहां पीड़ित, गरीब और असहाय लोग दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ संपन्न लोगों को हजारों-लाखों रुपये बांटे जाने से स्थानीय जनता में भारी नाराजगी है।
क्या है वायरल सूची का सच?
सोशल मीडिया पर ‘नायब तहसीलदार, घाट’ के हस्ताक्षर और मोहर वाली 25 लाभार्थियों की एक आधिकारिक सूची वायरल हो रही है। इस सूची में अलग-अलग ग्रामीणों को ₹3,000 से लेकर ₹1,00,000 तक की धनराशि आवंटित की गई है। सूची में ग्राम लुणतरा, सूंग, ल्वाणी, भैंटी, उरतोली, कुण्डी, वाद्ूक, गंडासू, सुतोल, ग्वाड और सितेल के निवासियों के नाम शामिल हैं। इसमें श्रीमती बुद्धि देवी को ₹1,00,000 और रमा भण्डारी को ₹50,000 की भारी-भरकम राशि दी गई है।
आम जनता का तीखा पक्ष: “हमारी गरीबी का मज़ाक उड़ाया गया है”
सूची सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों, बेरोजगार युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सोशल मीडिया से लेकर घाट के बाजारों तक लोग इस बंदरबांट पर थू-थू कर रहे हैं। जनता का पक्ष बेहद कड़ा और आक्रोशित है:
- पात्रों का हक मारा गया: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसे कई परिवार हैं जिनके पास बीमारी के इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, जिनके मकान आपदा में ढह चुके हैं, लेकिन उन्हें आज तक एक रुपया नहीं मिला। इसके विपरीत, जो लोग गाड़ियों में घूमते हैं और राजनेताओं के आगे-पीछे चमचागिरी करते हैं, उनके नाम सूची में सबसे ऊपर हैं।
- भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का नंगा नाच: जनता का सीधा आरोप है कि पटवारी से लेकर तहसील के बड़े अधिकारियों ने बिना किसी धरातलीय जांच (Physical Verification) के, केवल भाजपा नेताओं की पर्ची और सिफारिश पर यह सूची फाइनल कर दी। ग्रामीणों ने पूछा कि “क्या सरकारी खजाना भाजपा कार्यकर्ताओं की निजी जागीर है?”
- जांच और रिकवरी की मांग: उग्र जनता अब इस मामले में शांत बैठने को तैयार नहीं है। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस सूची की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई और अपात्रों से पैसा वापस नहीं वसूला गया, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
भाजपा का बचाव: “विधायक विकास पुरुष हैं, आरोप बेबुनियाद”
जनता के इस भारी आक्रोश के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरी तरह से अपने विधायक और सरकार के बचाव में ढाल बनकर खड़े हो गए हैं।
- विधायक को बताया ‘विकास पुरुष’: भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं का दावा है कि स्थानीय विधायक क्षेत्र के ‘विकास पुरुष’ हैं और उन्होंने घाट क्षेत्र की तस्वीर बदली है। समर्थकों का कहना है कि यह धनराशि पूरी तरह नियमानुसार और केवल उन्हीं लोगों को दी गई है जो इसके हकदार थे।
- विपक्ष पर मढ़ा साज़िश का आरोप: भाजपा पदाधिकारियों का तर्क है कि क्षेत्र में हो रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों और विधायक की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाकर कुछ विरोधी तत्व और विपक्ष के लोग जनता को भड़का रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकारी प्रक्रियाओं को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर यह मनगढ़ंत माहौल तैयार किया जा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक पारदर्शिता पर खड़ा होता है। ‘नायब तहसीलदार’ की मोहर लगी यह सूची चिल्ला-चिल्लाकर कह रही है कि सिस्टम में सबकुछ ठीक नहीं है। आखिर यह पैसा किस मद (Fund) से और किस संकट के निवारण के लिए बांटा गया, इसका कोई ब्योरा सार्वजनिक नहीं है।
जनता का यह आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जन-भावनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी चमोली इस पर क्या एक्शन लेते हैं, या फिर ‘विकास पुरुष’ के नारों के शोर में गरीबों की यह चीख दबा दी जाएगी।
– ब्यूरो रिपोर्ट, चमोली।