
बनाला की अनाथ बच्चियों के हक में उठी शासन तक आवाज: नंदा सेवा समिति ने मंत्री और सचिव से की त्वरित संरक्षण की मांग
चमोली/देहरादून (उत्तराखंड)। चमोली जनपद के नंदा नगर विकासखंड स्थित ग्राम सभा बनाला में माता-पिता के आकस्मिक निधन से अनाथ हुई तीन मासूम बच्चियों का मामला अब शासन और सरकार के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है। सामाजिक संगठन नंदा सेवा समिति ने जिला स्तर पर कार्रवाई करवाने के साथ-साथ अब उत्तराखंड सरकार के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की माननीय मंत्री और सचिव को पत्र भेजकर बच्चियों के स्थायी पुनर्वास और दीर्घकालिक सुरक्षा की जोरदार वकालत की है।
शासन और सरकार से की गई बड़ी मांगें
नंदा सेवा समिति के सचिव सजेंद्र कठैत द्वारा प्रेषित पत्रों में इस हृदय विदारक घटना का संज्ञान लेते हुए बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने की अपील की गई है। समिति ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है:
- निःशुल्क शिक्षा और सुरक्षित आवास: बच्चियों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए मुफ्त शिक्षा और रहने के लिए सुरक्षित राजकीय संरक्षण या आवास की व्यवस्था की जाए।
- भरण-पोषण और आर्थिक सहयोग: माता-पिता का साया उठने के बाद बच्चियों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट है, जिसके लिए सरकार से तत्काल और स्थायी आर्थिक सहायता की मांग की गई है।
जिला स्तर पर रंग ला रहे प्रयास, 17 मई को दी गई आर्थिक मदद
समिति के जमीनी प्रयासों का असर जिला स्तर पर दिखने लगा है। हाल ही में समिति के पदाधिकारियों ने अपर जिलाधिकारी (ADM) चमोली से मुलाकात की थी, जिसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों के सरकारी दस्तावेज और प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राहत की बात यह है कि 02 बच्चियों के प्रमाण पत्र तैयार हो चुके हैं और तीसरी बच्ची के कागजात भी जल्द बन जाएंगे।
इसके साथ ही, तात्कालिक राहत के रूप में नंदा सेवा समिति द्वारा 17 मई 2026 को बच्चियों को आर्थिक सहायता का चेक भी सौंप दिया गया है। समिति ने बच्चियों को आवास, शौचालय या शिक्षा से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए अपना हेल्पलाइन नंबर (मो. 8193986006) देकर हमेशा साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया है।
समिति का संकल्प: जब तक न्याय नहीं, तब तक प्रयास जारी
नंदा सेवा समिति के सचिव सजेंद्र कठैत ने कहा:
”इन मासूम बच्चियों का भविष्य अंधकार में न जाए, इसके लिए हम जिला प्रशासन से लेकर शासन और विभागीय मंत्री तक हर द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। हमारा लक्ष्य इन बच्चियों को सिर्फ तात्कालिक राहत देना नहीं, बल्कि इन्हें समाज में एक सुरक्षित और सम्मानित भविष्य दिलाना है।”
स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने नंदा सेवा समिति की इस चौतरफा पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग इस संवेदनशील मामले में जल्द ही कोई बड़ा और सकारात्मक निर्णय लेगा।
नंदा सेवा समिति — पीड़ित मानवता की सेवा ही हमारा परम धर्म।